तुझ को नहीं पता तो बता दूँ कि ऐ रक़ीबशाहों का शाह हूँ मैं क़लन्दर हूँ जान लेवो आग है कि तू उसे छूने से ख़ौफ़ खाबाक़ी रही मेरी तो मैं 'सागर' हूँ जान ले— Sagar Kaushik