बाज़ार में नसीब का सिक्का जो चल पड़ाआक़िल मिलेगा पैर पे बैठा गँवार केग़म छोड़ते नहीं हैं मिरा साथ और मैंबैठा हूँ इंतिज़ार में कब से बहार के— SAAGAR SINGH RAJPUT