Meaning of

क़ल्ब-ए-हजीं

qalb-e-hajeen • قلب حزیں

दुखी हृदय; शोक से भरा हृदय

sorrowful heart; heart full of grief

غمگین دل; غم سے بھرا دل

Arabic

अगर यतीम-ओ-ग़रीब की तुम मदद करोगे जज़ा मिलेगी
सुकून-ए-क़ल्ब-ए-हज़ी मिलेगा ख़ुदा नबी की रज़ा मिलेगी

कभी भी अपने दिलों के अंदर किसी से बुग़्ज़-ओ-हसद न रखना
निज़ाम-ए-रब-उल-क़दीर है ये ख़ता करोगे सज़ा मिलेगी

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मटकती चाल मतवाली हमारी जान ले लेगी
छनकती कान की बाली हमारी जान ले लेगी

छुपा कर चाँद सा मुखड़ा करो तुम हुस्न पर्दे में
नहीं तो होंठ की लाली हमारी जान ले लेगी

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क़ल्ब-ए-हज़ी मता-ए-जाँ यूँँ शाद कीजिए
कसरत के साथ आप हमें याद कीजिए

दौलत में चाहते हो इज़ाफा अगर शजर
तो बेकसों यतीमों की इमदाद कीजिए

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ख़्वाहिश-ए-बोसा-ए-गुल क़ल्ब-ए-हजीं में ले कर
एक भँवरा सर-ए-गुलशन बड़ा बेचैन सा है

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'शजर' जी हिज्र की बरछी से ज़ख़्मी क़ल्ब-ए-हज़ीं
पड़े हैं इश्क़ के मक़्तल में देखो उर्यां बदन

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जनाब-ए-क़ल्ब-ए-हज़ीं बे तहाशा तैश के साथ
महाज़-ए-इश्क़ को सर करने घर से निकले हैं

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सुकून-ए-क़ल्ब-ए-हज़ीं लबों की हँसी को हमराह लाएगी वो
दयार-ए-जान-ए-वफ़ा से सू-ए-शजर जो बाद-ए-सबा चलेगी

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अगर यतीम-ओ-ग़रीब की तुम मदद करोगे जज़ा मिलेगी
सुकून-ए-क़ल्ब-ए-हज़ी मिलेगा ख़ुदा नबी की रज़ा मिलेगी

कभी भी अपने दिलों के अंदर किसी से बुग़्ज़-ओ-हसद न रखना
निज़ाम-ए-रब-उल-क़दीर है ये ख़ता करोगे सज़ा मिलेगी

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मटकती चाल मतवाली हमारी जान ले लेगी
छनकती कान की बाली हमारी जान ले लेगी

छुपा कर चाँद सा मुखड़ा करो तुम हुस्न पर्दे में
नहीं तो होंठ की लाली हमारी जान ले लेगी

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यह वाक्यांश गहरी उदासी का आभास देता है, एक ऐसे हृदय की भावना को पकड़ता है जो शोक से भरा हुआ है। कविता में, यह अक्सर दुःख और लालसा के सार्वभौमिक मानव अनुभव का प्रतीक होता है।

कवि इस वाक्यांश का उपयोग हानि और भावनात्मक गहराई के विषयों की खोज के लिए करते हैं। यह आनंद के क्षणों के साथ विरोधाभास करता है, मानव भावनाओं की द्वैतता को उजागर करता है। अक्सर, यह अधूरी इच्छाओं के लिए एक रूपक के रूप में कार्य करता है।

कविता के क्षेत्र में, दुखी हृदय गहन अभिव्यक्ति का एक माध्यम बन जाता है।