Meaning of

ज़र्फ़

zarf • ظرف

बर्तन; क्षमता; शिष्टता

container; capacity; elegance

برتن; صلاحیت; شائستگی

Arabic

मकरूज़ होना तेरा गँवारा नहीं मुझे
कमज़र्फ मुझ को सारी अज़ीयत क़ुबूल है

2

Download Image

जानते भी हो मुहब्बत की हक़ीक़त साथी
ऐसी कम-ज़र्फ़ी छलक जाती है बुत-ख़ाने में

22

Download Image

कह रहा है शोर-ए-दरिया से समुंदर का सुकूत
जिस का जितना ज़र्फ़ है उतना ही वो ख़ामोश है

17

Download Image

ज़ीस्त की खोखली हैहात पे रह जाते हैं
वो जो कमज़र्फ़ हैं, औक़ात पे रह जाते हैं

ओढ़ लेती है शराफ़त की रिदा रोज़ सहर
और इल्ज़ाम फ़क़त रात पे रह जाते हैं

12

Download Image

ज़मीं को तर-ब-तर करने किसी दिन आएगा बादल
न जाने किन ग़रीबों के घरों को खाएगा बादल

सितारे नोच लाऊँगा किसी दिन ज़िद पे आया तो
अभी ग़र्दिश में हूँ यारों बहुत इतराएगा बादल

ये सारी मछलियाँ जब बद-दुआ देने लगेंगी तब
समुंदर प्यास से तड़पेगा और मर जाएगा बादल

कहीं पर कम कहीं ज़्यादा ये कैसा फ़ैसला तेरा
सॅंभल जा वक़्त है वरना बहुत पछताएगा बादल

मुनाफ़िक़ है ये रातों का किसी को भी नहीं बख़्शा
जवानी ज़ुल्फ़ आँखें और क्या-क्या खाएगा बादल

हमीं हैं जो तुझे सर पे चढ़ाकर फिरते रहते हैं
कुशादा ज़र्फ़ कर लें हम तो क्या टिक पाएगा बादल

7

Download Image

देखे दुनिया पंछी का ज़र्फ
सय्यादी निगरान किया है

जितनी है औक़ात तुम्हारी
ऐसों को दरबान किया है

6

Download Image

लहर का ज़र्फ़ जितना था, समुंदर के ही अंदर था
जरा सी ख़ाक से मिल कर किनारों पे है दम तोड़ा

5

Download Image

तेरी बीवी का ज़र्फ़ सोचना कितना मुश्किल
तू उस के सामने पराई औरत तकता है

4

Download Image

ख़ुदा भी देख ले गर ज़र्फ़ मेरा तो करेगा वाह
उन्होंने ख़ुद-कुशी कर ली जिन्हें था मुझ सेे आधा दुख

यही बस इक सहूलत आदमी होने पे है 'जगवीर'
कि औरत को ज़माने ने दिए हैं हम सेे ज़्यादा दुख

4

Download Image

वो दुनिया से बिल्कुल जुदा देखते हैं
जो कम-ज़र्फ़ में हौसला देखते हैं

4

Download Image

मकरूज़ होना तेरा गँवारा नहीं मुझे
कमज़र्फ मुझ को सारी अज़ीयत क़ुबूल है

2

Download Image

जानते भी हो मुहब्बत की हक़ीक़त साथी
ऐसी कम-ज़र्फ़ी छलक जाती है बुत-ख़ाने में

22

Download Image

'ज़र्फ़' मूल रूप से एक बर्तन या पात्र को संदर्भित करता है, जो कुछ धारण करने की क्षमता का प्रतीक है। कविता में, यह उस शिष्टता और गरिमा तक विस्तारित होता है जिसके साथ कोई अपने आप को या अपनी भावनाओं को प्रस्तुत करता है।

कवि अक्सर 'ज़र्फ़' का उपयोग किसी पात्र की आंतरिक शक्ति और शिष्टता का वर्णन करने के लिए करते हैं। यह बाहरी दिखावे या परिस्थितियों के विपरीत हो सकता है, जो किसी के चरित्र की गहराई को उजागर करता है।

कविता में, 'ज़र्फ़' आंतरिक शक्ति और शिष्टता का रूपक बन जाता है। यह चरित्र के सच्चे सार पर चिंतन का आमंत्रण देता है।