जो भी हमको छोड़कर के जाते हैं
बाद में वो सब बड़ा पछताते हैं
दर्द तन्हाई उदासी ग़म मलाल
कुछ ही तो हैं जो मुझे अपनाते हैं
हमको आलिम तो बुरा कहते ही हैं
हमको जाहिल भी बुरा बतलाते हैं
उसके हाथों के छुए सब फूल अब
अपनी क़िस्मत पे बहुत इतराते हैं
हमको अच्छे लगते हैं उतना ही आप
जितना अम्मी को पिता जी भाते हैं
टल गई है ख़ुद-कुशी इस बात पर
हम तो केवल आप से बतियाते हैं
दुनिया की तो ख़ैर हम क्या ही कहें
आप भी अब झूठी क़स
में खाते हैं
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