रात दिन कितने अच्छे रहेंगे
घर में जब हम इकट्ठे रहेंगे
फेंक मत जेब से खोटे सिक्के
साथ रख ले खनकते रहेंगे
माँग शायद न भर पाऊँ लेकिन
तेरे कानों में झुमके रहेंगे
रात से पूछो जुगनू का आलम
हम तो करवट बदलते रहेंगे
मिट गई प्यास आँखों की 'धीरेन्द्र'
होंठ कब तक तरसते रहेंगे
— Dhirendra Pratap Singh















