आँखों को नया धाम मिला तुम सेे बिछड़ केहोंठों को भी इक नाम मिला तुम से बिछड़ केसोचा था कि मर जाऊँगा मैं दूर हुआ तोदिल को मगर आराम मिला तुम से बिछड़ के— Dhirendra Pratap Singh