इसलिए हम सेफ़र बनाया था
उस
में अपना वुजूद पाया था
रफ़्ता रफ़्ता तराश कर उसने
बे-वफ़ाई को फ़न बनाया था
शौक़ उसको खिलौनों का है बहुत
उसके इक दोस्त ने बताया था
जानते हो वो क्यूँँ हुआ पागल
एक बुलबुल से दिल लगाया था
एक दो साल हम पे भी यारो
एक पंडित का घटिया साया था
कभी तो टूटना ही था मेरा दिल
कितनों का मैंने दिल दुखाया था
एक तितली ने पंख तोड़ लिए
इतना फूलों ने आज़माया था
उसने इंसानों वाली हरकत की
हमने जिसको ख़ुदा बनाया था
उसको हिस्से में सिर्फ़ ख़ुशियाँ मिलीं
मेरी क़िस्मत में बस ग़म आया था
इसलिए गालियाँ दी जुगनू को
रौशनी सब जगह लुटाया था
ग़ैर-हाजिर थी क्लास में वो आज
पूछो मत कैसे दिन बिताया था
दुनिया तो ख़ैर दुनिया थी लेकिन
मुझे अपनों ने भी रुलाया था
रम्ज़ जो इन किताबों में छुपा है
जौन को भी बहुत सताया था
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