ख़ूब-सूरत है ये जहाँ देखो
ये ज़मीं ही क्यूँ आसमाँ देखो
चलते रहना है जानिब-ए-मंज़िल
रुक न जाए ये कारवाँ देखो
एक उंगली उठी है इस जानिब
तीन का रुख़ भि मेरी जाँ देखो
क्या कहा तुम को भी मोहब्बत है?
साथ छोड़ोगे तुम कहाँ देखो
पूछो मत उन कि बेरुख़ी क्यूँ है
उन का मतलब है जो वहाँ देखो
राह देखा किए बहारों की
आ गया मौसम-ए-ख़िज़ाँ देखो
तोड़ने वाले थक गए 'असलम'
दिल तिरा अब भी है जवाँ देखो
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