मर ना जाएँ हम कहीं आँखों में पानी छोड़िए
कैसे टूटा दिल हमारा वो कहानी छोड़िए
हम को फूलों की कताएँ रास कब ही आईं हैं
नागफनियाँ ही हमें दो रातरानी छोड़िए
आओ अब हम खो चलें इक दूसरे के इश्क़ में
किस से क्या वादे किए बातें पुरानी छोड़िए
गर किसी का होना चाहे फिर यहीं पर रुकिए भी
कुछ समय के ही लिए तो ये रवानी छोड़िए
— Jitendra "jeet"















