दीप ऐसा बुझा फिर जलेगा नहीं
दाग ऐसा लगा जो छुटेगा नहीं
तुम मिटा तो रहे हो निशाँ प्यार के
नाम दिल पर लिखा है मिटेगा नहीं
तुम लगा ही रहे तो करो भी यक़ीं
दिल तुम्हारा कहीं पर लगेगा नहीं
साथ जिन के सफ़र पे जो निकले हो तुम
कोई मेरी तरह अब रुकेगा नहीं
मैं ने दी जो दुआ बद्दुआ मानिए
दिल में उनके भी कोई रुकेगा नहीं
मशवरा जा कहो दुश्मनों से ज़रा
सर कटेगा मिरा पर झुकेगा नहीं
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