मैं तो अब शाम का ढलते सूरज सा हूँतुम मेरी ज़िन्दगी का उजाला बनोमैं इबादत करूँ हर घड़ी हर पहरतुम मेरी बंदगी तुम शिवाला बनो— Jitendra "jeet"