badi hi yaad aati thii mohabbat jaam ke baad | बड़ी ही याद आती थी मोहब्बत जाम के बाद

  - Harsh Kumar Bhatnagar

बड़ी ही याद आती थी मोहब्बत जाम के बाद
मगर तब साथ होती थी ये हिजरत जाम के बाद

हमें जो होश में रहते हुए भी मिल न पाया
तो क्या ही करते फिर कोई मशक़्क़त जाम के बाद

खुलेंगे राज़ अब हर शख़्स के सब के मुक़ाबिल
लगी है बस्तियों में इक अदालत जाम के बाद

गिलासों में नज़र आने लगी जब तेरी सूरत
मैं ले कर चल दिया घर को अज़िय्यत जाम के बाद

उन्हें तो दूर रहना चाहिए ऐश-ओ-तरब से
जिन्हें हर वक़्त होती है नदामत जाम के बाद

  - Harsh Kumar Bhatnagar

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