tujhse bichhurne vaala tha ye phool jhadne vaala tha | तुझ सेे बिछड़ने वाला था ये फूल झड़ने वाला था

  - Harsh Kumar Bhatnagar

तुझ सेे बिछड़ने वाला था ये फूल झड़ने वाला था
कुछ इसलिए अपनी कहानी से निकलने वाला था

मुझको परिंदों ने बताई अहमियत आज़ादी की
वर्ना शजर की आड़ में तितली पकड़ने वाला था

तेरी जुदाई खेंच लाई है मदीने तक मुझे
मैं काँच के जैसे वगरना बस बिखरने वाला था

अच्छा हुआ मेरी अचानक ही ये आँखें खुल गईं
मैं गर्दिशों में कश्तियों के साथ बहने वाला था

कुछ इसलिए भी है दर-ओ-दीवार से शिकवा मुझे
इक दिन मैं अपने ख़्वाब में ही घुट के मरने वाला था

  - Harsh Kumar Bhatnagar

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