tumhaare baad ye dil gar dukha nahin hota | तुम्हारे बाद ये दिल गर दुखा नहीं होता

  - Harsh Kumar Bhatnagar

तुम्हारे बाद ये दिल गर दुखा नहीं होता
हमारे पाँव में भी आबला नहीं होता

अभी भी वक़्त है तू रोक ले वगरना दोस्त
बिछड़ने वालों से फिर राब्ता नहीं होता

क़लम की नोक से दुनिया भी काँप जाती है
ये दस्तख़त से ज़माने में क्या नहीं होता

ये ज़िंदगी तो फ़क़त चार दिन की है जी ले
वगरना बाद में कुछ फ़ैसला नहीं होता

अना से लोगों के घर तक बिखरने लगते हैं
तू कहता है कि कोई मसअला नहीं होता

अगर समझने की कोशिश भी करता तू उस वक़्त
तो आज शे'र में भी वसवसा नहीं होता

जो कुछ भी होना है जो कुछ हुआ है लिख रखा है
बिना ख़ुदा के कोई मो'जिज़ा नहीं होता

  - Harsh Kumar Bhatnagar

More by Harsh Kumar Bhatnagar

As you were reading Shayari by Harsh Kumar Bhatnagar

Similar Writers

our suggestion based on Harsh Kumar Bhatnagar

Similar Moods

As you were reading undefined Shayari