maine tire hawaale sab kuchh hi kar diya hai | मैंने तिरे हवाले सब कुछ ही कर दिया है

  - Harsh Kumar Bhatnagar

मैंने तिरे हवाले सब कुछ ही कर दिया है
तूने मुझे मगर बस ज़ख़्म-ए-जिगर दिया है

फैला के हाथ उस से कुछ माँगता नहीं हूँ
रख लेता हूँ ख़ुशी से जो भी हुनर दिया है

वो काँपने लगा था बारिश में भीग कर जब
तस्वीर खेंच उसकी तब जा के घर दिया है

मुश्किल बड़ा है अब तो फ़ुर्क़त में उसकी जीना
यादों ने रोज़ मुझको दर्द-ए-जिगर दिया है

इक मैं हूँ तेरी ख़ातिर सब कुछ लुटा चुका हूँ
तूने तो प्यार मुझको बालिश्त-भर दिया है

तुझको नहीं मुहब्बत फिर हक़ नहीं है बनता
क्या सोच दर्द तूने ता-बा-जिगर दिया है

ये ‘हर्ष’ ने ग़ज़ल भी सीखी ‘अमान’ से है
जो भी कहा है उसने मैंने वो कर दिया है

  - Harsh Kumar Bhatnagar

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