na jaane kis kii wajah se gumaan aa gaya hai | न जाने किस की वजह से गुमान आ गया है

  - Harsh Kumar Bhatnagar

न जाने किस की वजह से गुमान आ गया है
ज़मीं से लड़ने भी ख़ुद आसमान आ गया है

उदासी में सदा रहना पसंद था मुझको
ये कौन घर में मिरे ख़ुश-ज़बान आ गया है

ये कामयाबी से मेरी भी जल रहे हैं जो
इन्हें बता दो नया नौजवान आ गया है

मैं शे'र कहने लगा हूँ तू ग़ौर से सुनना
मिरी ज़बान में भी ख़ुश-बयान आ गया है

तू अब छिपा भी नहीं सकता इश्क़ को अपने
गले पे हल्का सा तेरे निशान आ गया है

सफ़र पे मेरे किसी ने भी साथ तक न दिया
मगर गिराने को सारा जहान आ गया है

  - Harsh Kumar Bhatnagar

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