udaasi ka mirii koii nikaal hal baapu | उदासी का मिरी कोई निकाल हल बापू

  - Harsh Kumar Bhatnagar

उदासी का मिरी कोई निकाल हल बापू
बिठा के मुझको तू शाने पे फिर से चल बापू

गुरेज़ करने लगा हूँ मैं आइने से अब
मैं डर रहा हूँ मिरे हाथ को तू मल बापू

बग़ैर तेरे ये घर भी उथल-पुथल हो गया
तू एक बार तो तस्वीर से निकल बापू

मैं दिल की बात न कह पाया तेरे होते हुए
सो तेरी याद में लिक्खी है ये ग़ज़ल बापू

तू देख लेना मिरी कामयाबी जन्नत से
हूँ तेरे नाम से मशहूर आजकल बापू

  - Harsh Kumar Bhatnagar

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