आप उस्ताद हैं जो लिखते हैं बेहतर ग़ज़लें
एक हम हैं जो सदा लिखते हैं फ़र-फ़र ग़ज़लें
ज़िंदगी चल रही है बस मिरी छह चीज़ों से
इश्क़ घर-बार अना दोस्ती दफ़्तर ग़ज़लें
आप तलवारों से मक़्तल में बहाओगे ख़ून
हम वरक़ फाड़ के फेंकेंगे ये नश्तर ग़ज़लें
जब हवाओं ने चराग़ों को बुझाना चाहा
तब कहीं काम में आईं ये मुनव्वर ग़ज़लें
इसलिए भी वो सदा ग़ौर से सुनता है मुझे
नीचे रखता हूँ ज़बाँ के मैं मुअत्तर ग़ज़लें
एक ख़्वाहिश कि जनाज़े से मिरे जाते वक़्त
आप इक बार पढ़ें मेरी बहत्तर ग़ज़लें
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