यक़ीन टूटने पर बस मलाल रहता है
मगर निगाहों में फिर भी सवाल रहता है
हुजूम घर को चला जाता है तमाशे के बाद
मगर जमूरे के दिल में वबाल रहता है
कभी बिछड़ने का जो दिल करे तो याद रहे
हमारे पास फ़क़त एक साल रहता है
अभी तो तीर लगा है फ़क़त ये सीने में
अभी तो ख़ून में होना उबाल रहता है
क़रीब आता है जब भी हमारे वस्ल का दिन
हमारे पाँव का नाख़ून लाल रहता है
हमारे हाथ में कुछ घाव रक़्स करते हैं
हमारे दिल में अजब सा वबाल रहता है
As you were reading Shayari by Harsh Kumar Bhatnagar
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