ये मुफ़्लिसी से कभी तू भी प्यार करके देख
हर एक रंज को सीने उतार करके देख
कभी जो नींद में मरने का डर सताने लगे
तू अपने ख़्वाब में माँ को पुकार करके देख
अगर है ख़ौफ़ समुंदर में डूब जाने का
तो मछलियों पे ज़रा एतिबार करके देख
ये जंग लड़ना तो मुश्किल है सिर्फ़ तीरों से
तो एक बार तू लहजे से वार करके देख
ये तेरा दर्द ही ज़रिया है कामयाबी का 'हर्ष'
तू अपने अश्क ग़ज़ल में शुमार करके देख
As you were reading Shayari by Harsh Kumar Bhatnagar
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