humsafar ke vaaste bhi ek to itwaar. ho | हम सेफ़र के वास्ते भी एक तो इतवार हो

  - Manohar Shimpi

हम सेफ़र के वास्ते भी एक तो इतवार हो
घूमना भी साथ खाना भी किधर हर बार हो

ऐ मुहब्बत भी बड़े ही काम की तो चीज़ है
फिर दिलों-दिल में उभरता देख ही लो प्यार हो

एक दिन का है नहीं क़िस्सा मेरे यारों यही
रोज़ जीना और मरना हिज्र में दुश्वार हो

ढूँढता ही था जिसे मैं दर-ब-दर ही फिर कहीं
दिल मचलता है मेरा ही जब कभी दीदार हो

कैसे दरिया जश्न कोई अब मनाए वस्ल का
जब समंदर और साहिल दूर ही उस-पार हो

ऐ 'मनोहर' अब अदू कोई बचेगा कैसे फिर
हाथ फ़ौजी के बड़ी ही ख़ास जब तलवार हो

  - Manohar Shimpi

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