महफ़िल में सारे ही गाने हैं
सुनने को लोग अभी आने हैं
अक्सर लोग बदलते क्यूँँ रहते
लगता तर्ज़ से सब अनजाने हैं
अनजान कौन था चलते चलते
फिर भी बदले क्यूँँ पैमाने हैं
ऐसे यादों में बसे वो नग़्में
बिसरे गीत सुहाने गाने हैं
पहने नए लिबास अगर तू ही
अंदाज़ फिर नज़र तो आने हैं
रुकता कौन 'मनोहर' ज़मीं पे ही
चले गए जो जाने माने हैं
As you were reading Shayari by Manohar Shimpi
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