sahib-e-masnad rahe ho baat andar kii batao | साहिब-ए-मसनद रहे हो बात अंदर की बताओ

  - Manohar Shimpi

साहिब-ए-मसनद रहे हो बात अंदर की बताओ
कारनामा ख़ूब अच्छा है किया तो मुस्कुराओ

वक़्त रहते तुम बुलंदी पर पहुँचते ठीक होता
फ़र्क पड़ता है बहुत अब इस जगह से और जाओ

रोष थोड़ा है ज़रूरी और होना चाहिए यार
कैसे यूँँ ही कोई मंज़िल सर करोगे तुम बताओ

ज़िंदगी के उन तक़ाज़ों से सभी कुछ सीखते हैं
आरज़ू भी तो रहेगी फिर न उस को ही दबाओ

दोस्तों का ख़ास मिलना याद आता है 'मनोहर'
उन पलों को याद करके ख़ूब ख़ुशियाँ अब मनाओ

  - Manohar Shimpi

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