रंग हिन्दू और मुस्लिम का जुदा कैसे हुआ
हाथ था
में कोई परचम से ख़ुदा कैसे हुआ
बंदगी से ख़ुश-नुमा माहौल जिसने है किया
फिर इबादत रोज़ करके ना-ख़ुदा कैसे हुआ
राब्ता तेरा मेरा ही कैसे बेरुख़ हो गया
तेरा साया अब बता मुझ से जुदा कैसे हुआ
'इश्क़ मज़हब की तरह गोया अगर सब मानते
दिल-लगी में लफ़्ज़ कोई बा-ख़ुदा कैसे हुआ
क्या असर उस के बदन का ही “मनोहर” कर गया
सख़्त दिल वाला सही में या-ख़ुदा कैसे हुआ
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