vaham karna agar buraai hai | वहम करना अगर बुराई है

  - Manohar Shimpi

वहम करना अगर बुराई है
तंज कसना कहाँ भलाई है

राह हुस्न-ए-फ़रोग से जब हो
या-ख़ुदा क्या ये रहनुमाई है

जिस्म के दाम भी कहीं लगते
क्या सही क्या ग़लत कमाई है

बात जब ए'तिबार की ही हो
गुफ़्तगू में छिपी अदाई है

जाल जंजाल तीन पत्ती का
बोलते हाथ की सफ़ाई है

आज-कल ज़िंदगी जिएँ कैसे
रहनुमाई में ही भलाई है

दौर होता जुदा-जुदा लेकिन
आज-कल भी तो मुँह-भराई है

शे'र शब में दिखे 'मनोहर' जब
बा-ख़ुदा कैसे ये दुहाई है

  - Manohar Shimpi

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