ये दिल तेरी ज़ुल्फ़ों से गिरफ़्तार हुआ है
ख़ामोश लबों से ही तो इज़हार हुआ है
वो शोख़ निगाहों से तलबगार हुआ है
दहलीज़ सजाके ही वो तैयार हुआ है
आँखों से अगर नूर छलकता तो यक़ीनन
महसूस ये होता तेरे से प्यार हुआ है
मालूम हुआ कैसे वफ़ाऍं ही निभाऍं
तालीम से कोई न वफ़ादार हुआ है
महफ़िल मेरी रंगीन हुई हुस्न से लेकिन
माहौल तुम्हीं से मेरे सरकार हुआ है
क्या ख़ूब अदा और हसीं सी तेरी बाहें
ऐ 'इश्क़ गले लग के ही ज़ुन्नार हुआ है
आसान नहीं यार ग़म-ए-हिज्र में जीना
दिल मेरा लगा जैसे गुल-ए-ख़ार हुआ है
बस प्यार ग़म-ए-राह से कुछ और ही होता
दिलदार तेरी सोच से ग़म-ख़्वार हुआ है
मत बूझ पहेली वो शिफ़ा की ही मनोहर
इक तीर मेरे दिल में जिगर पार हुआ है
As you were reading Shayari by Manohar Shimpi
our suggestion based on Manohar Shimpi
As you were reading undefined Shayari