बेतुका प्रोग्राम्स अब आने लगे हैं
देखके हम सिर्फ़ कतराने लगे हैं
आसमाँ में दूर रहके क्यूँ गरजते
रोष से अब अब्र टकराने लगे हैं
ख़ूब मंज़र देखने को मिल रहे हैं
बाढ़ से अब लोग घबराने लगे हैं
कौन है मौजूद देने को दवाई
महज़ चारा-गर नज़र आने लगे हैं
कुछ फ़रिश्ते हैं दवाखाने में यारों
जो मरीज़ों को ही समझाने लगे हैं
कोई मंज़र कैफ़ियत से काश होता
सोच के हम उस पे इतराने लगे हैं
सर्द मौसम की तड़प क्या है 'मनोहर'
हिज्र में अंगार सुलगाने लगे हैं
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