मंगल कहाँ होता किसे थी ये ख़बर
हाँ आज़माने को उसे रखते नज़र
आंधी सदा तूफ़ान भी लाती वहाँ
तकमील से सच्ची मिली फिर ख़ुश-ख़बर
इंसान का कोई पता है ही नहीं
ऐसी जगह कैसे मिलेगा हम सेफ़र
क़ुदरत हमेशा साथ नहीं देती वहाँ
तूफ़ान का भी बारहा दिखता असर
थोड़े मसाफ़त बाद ही पाया सभी
फिर कामयाबी से मिलाते हैं नज़र
हाँ फ़ख़्र है मंगल दिखाया है हमें
ज़र्रा-नवाज़ी से बताना ख़ुश-ख़बर
दस्तक 'मनोहर' दी अभी मंगल पे ही
इज़्ज़त करो तकमील की ऐ हम सेफ़र
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