मुसलसल दूर उड़ने का परिंदा ही हुनर रखता
ज़मीं से अब्र छूने का बड़ा गहरा जिगर रखता
हमेशा साथ चलने पर यक़ीं करता रहा हूँ मैं
सफ़र में कारवाँ चलते सभी की फिर ख़बर रखता
ख़ुदा अक्सर मुझे छोटे ही बच्चों में नज़र आता
कहाँ हैं इल्म उन सबको ख़ुदा उनकी ख़बर रखता
किसानों की कहाँ दिक़्क़त समझता हैं कोई नेता
सियासत वोट की करके सभी पर वो नज़र रखता
मुसाफ़िर हूँ हमेशा ही सफ़र में रोज़ मैं चलता
सफ़र में ख़ार रह रह कर चुभे तो पा किधर रखता
'मनोहर' अस्ल में वो ही अगर साया बनी होती
बिठा के रोज़ पलकों पर उसे शाम-ओ-सहर रखता
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