पाँव की बेड़ियाँ थे हम दोनों
जंगली बिल्लियाँ थे हम दोनों
दिल धड़कता नहीं खनकता था
हाथ की चूड़ियाँ थे हम दोनों
हम कभी अच्छे दोस्त होते थे
बाग में तितलियाँ थे हम दोनों
'इश्क़ की आँच में जला है जिस्म
अधपकी रोटियाँ थे हम दोनों
धूप में छाँव जैसी आँखें दो
कमरे में खिड़कियाँ थे हम दोनों
हुस्न की बात शे'र में कह दी
वाकई बिजलियाँ थे हम दोनों
वो जो मिलकर भी मिल नहीं पाती
रेल की पटरियाँ थे हम दोनों
- नीरज नीर
Read Full