वैसे तो हम यार भुला भी देते पर
ज़ख़्म दिए हैं उस ने मेरे सीने पर
इतने दिन तक साथ रहे हैं हम दोनों
आदत सब जाएँगी उस के बच्चे पर
अब तुम बतलाओगे उस के बारे में
देखो इक तिल और है उस के कंधे पर
जिस घर में बस माँ हो , मैं ने देखा है
फिर ज़िम्मेदारी होती है बेटे पर
— Nirvesh Navodayan















