yuñ mere dil ke charaagon ko bujhaate kyun ho | यूँँ मेरे दिल के चराग़ों को बुझाते क्यूँ हो

  - Nityanand Vajpayee

यूँँ मेरे दिल के चराग़ों को बुझाते क्यूँ हो
मेरी तकलीफ़ को तुम और बढ़ाते क्यूँ हो

तुम सेे छुपता ही नहीं चेहरे पे दिख जाता है
इतनी शिद्दत से मसाइल को छुपाते क्यूँ हो

मौत के तुम वो फ़रिश्ते जो मिटाते दुनिया
रहनुमाई का तमाशा ये दिखाते क्यूँ हो

तुमने बारूद पे दुनिया को बिठा रक्खा मियाँ
फिर किसी और को मुजरिम यूँँ बनाते क्यूँ हो

दिल की दहलीज़ अँधेरों से सनी है बिल्कुल
जल रहा दिल का दिया झूठ बताते क्यूँ हो

'नित्य' शैताँ की हिमायत में लगे शाम-ओ-सहर
रोज़ इंसान को इंसाँ से लड़ाते क्यूँ हो

  - Nityanand Vajpayee

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