आवारा पागल दीवाना जाने क्या क्या कहती है
मेरे बारे में दुनिया की राय बहुत कुछ रहती है
टीले वीले पत्थर वत्थर झाड़ी वाड़ी या मिट्टी
सब कुछ बह जाता घुलमिल कर जब-जब नदिया बहती है
गाली-वाली थप्पड़-वप्पड़ और अम्मी की धमकी भी
मेरे कारण मेरी पगली इतना सब कुछ सहती है
विष पीकर अमरत्व लुटा दे त्याग तपोनिधि हो जाए
स्वर्ण महल दे दान उसी के सर पर गंगा रहती है
प्रेम नहीं तोला जा सकता सोना चाँदी हीरों से
रावण की लंका को सीता विरहानल से दहती है
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