gham churaate ro pade the | ग़म चुराते रो पड़े थे

  - Parul Singh "Noor"

ग़म चुराते रो पड़े थे
हम हँसाते रो पड़े थे

जो ग़ज़ल थी नाम तेरे
गुनगुनाते रो पड़े थे

हँस रहे थे काफ़ी दिन से
मुस्कुराते रो पड़े थे

दूर से कहते थे ख़ुश हैं
पास आते रो पड़े थे

आग दिल की थी बुझानी
ख़त जलाते रो पड़े थे

हिज्र में ये सब सितारे
झिलमिलाते रो पड़े थे

बढ़ गया था दर्द हदस
हँसते गाते रो पड़े थे

शहर ख़ुशियाँ खा गया था
गाँव जाते रो पड़े थे
'इश्क़ का था इम्तिहाँ वो
आज़माते रो पड़े थे

सोच कैसा वाक़िआ था
दिल दुखाते रो पड़े थे

  - Parul Singh "Noor"

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