साथ रख कर ये मुहब्बत अपनी अपनी

जी रहे हैं लोग सब बर्बादी अपनी

इक ज़रा सा रास्ता क्या माँगा उस से
उस ने तो सारी इमारत ढा दी अपनी

आदमी वो तो ज़ियादा मतलबी है
जो दिखाता फिरता है अच्छाई अपनी

पास मेरे तुम तो आने से रहे सो
आज कल में मौत ही है आनी अपनी
इश्क़ में आबाद होना था मुझे पर
हिज्र में ही ख़ाक है बरनाई अपनी

— Piyush Nishchal

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