साथ रख कर ये मुहब्बत अपनी अपनी
जी रहे हैं लोग सब बर्बादी अपनी
इक ज़रा सा रास्ता क्या माँगा उस सेे
उसने तो सारी इमारत ढा दी अपनी
आदमी वो तो ज़ियादा मतलबी है
जो दिखाता फिरता है अच्छाई अपनी
पास मेरे तुम तो आने से रहे सो
आज कल में मौत ही है आनी अपनी
'इश्क़ में आबाद होना था मुझे पर
हिज्र में ही ख़ाक है बरनाई अपनी
As you were reading Shayari by Piyush Nishchal
our suggestion based on Piyush Nishchal
As you were reading undefined Shayari