मियाँ बरसों से इक ही बात ठानी है
कि मुझ को आग अश्कों से बुझानी है
मुझे बर्बाद तो होना ही था यारों
मुहब्बत का चलन ही ख़ानदानी है
मुहब्बत कर रहा है लड़का करने दो
नई गर्मी है, तेज़ी है, जवानी है
जो लड़की नौ बरस डरती रही मुझ से
वही छह साल से मेरी दिवानी है
मिरे शब्दों को पढ़के ये समझ लो तुम
किसी के सुर्ख़ होंठो की कहानी है
— Piyush Nishchal















