आपके गाल की लालिमा होना
जैसे कोई ग़ज़ल का नया होना
लोग कमतर हुए जिनपे नाज़िल है
आपके जैसा चेहरा खिला होना
सबने चाहा कि हम दोनों मिल जाएँ
भाग्य में ही नहीं था तेरा होना
हमको आदम भी होना मुयस्सर नइँ
आपको रास आया ख़ुदा होना
हुस्न ही सिर्फ़ अज़मत को काफी नइँ
आपको चाहिए पारसा होना
यार 'राकेश' कैसे भुलाओगे
उस का यूँँ आबरू से जुदा होना
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