किसी से प्यार करते हो तो उस पे जाँ लुटाते हो
तुम्हारी ये अदा अच्छी है तुम दिल से निभाते हो
हमारे सामने तुम उस को यूँँ क्या क्या नहीं कहते
मगर सुनते हैं जी तुम उस को शहज़ादी बुलाते हो
अदाकारी ज़रूरी है मगर इतनी नहीं शाइर
हमीं से प्यार करते हो हमीं से ग़म छुपाते हो
मुहब्बत एक ख़ुशबू है छुपाए छुप नहीं सकती
अदाकारी के पर्दे में हक़ीक़त क्यूँ छुपाते हो
हमारे घर की बुनियादों में नफ़रत साँस लेती है
हमारे घर के बच्चों को मुहब्बत क्यूँ सिखाते हो
वो लड़की ख़ानदानी है तुम्हें कुछ कह नहीं पाती
मगर 'राकेश' तुम उस को मियाँ काफ़ी सताते हो
Read Full