phool rakkha hai kabhi khaar nahin rakkha hai | फूल रक्खा है कभी ख़ार नहीं रक्खा है

  - Rakesh Mahadiuree

फूल रक्खा है कभी ख़ार नहीं रक्खा है
एक पर्दे में दो किरदार नहीं रक्खा है

जिस को चाहेंगे उसे साफ़ पता लगता है
हमने दिल में कभी दीवार नहीं रक्खा है

हमने ये उम्र गुज़ारी है अकेले लेकिन
हमने अबतक कभी दस्तार नहीं रक्खा है

सारी दुनिया ने तका दिल का तमाशा मेरे
आप कहते हैं कि दिलदार नहीं रक्खा है

आप कहिए तो कोई दूसरी देखी जाए
आपके वास्ते दिल प्यार नहीं रक्खा है

जाइए ढूँढ़िए दुनिया में कहीं और वफ़ा
मेरे दिल में तो ये सरकार नहीं रक्खा है

हमको मालूम है जन्नत की हक़ीक़त ग़ालिब
नाम हमने कभी गुलज़ार नहीं रक्खा है

मेरे बच्चे भी मुहब्बत में वफ़ा करते हैं
मैं ने घर में कभी हथियार नहीं रक्खा है

  - Rakesh Mahadiuree

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