फूल रक्खा है कभी ख़ार नहीं रक्खा है
एक पर्दे में दो किरदार नहीं रक्खा है
जिस को चाहेंगे उसे साफ़ पता लगता है
हमने दिल में कभी दीवार नहीं रक्खा है
हमने ये उम्र गुज़ारी है अकेले लेकिन
हमने अबतक कभी दस्तार नहीं रक्खा है
सारी दुनिया ने तका दिल का तमाशा मेरे
आप कहते हैं कि दिलदार नहीं रक्खा है
आप कहिए तो कोई दूसरी देखी जाए
आपके वास्ते दिल प्यार नहीं रक्खा है
जाइए ढूँढ़िए दुनिया में कहीं और वफ़ा
मेरे दिल में तो ये सरकार नहीं रक्खा है
हमको मालूम है जन्नत की हक़ीक़त ग़ालिब
नाम हमने कभी गुलज़ार नहीं रक्खा है
मेरे बच्चे भी मुहब्बत में वफ़ा करते हैं
मैं ने घर में कभी हथियार नहीं रक्खा है
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