रुख़ का सुकूँ दिल का सहारा है मुझे
वो दोस्त हद से ज़्यादा प्यारा है मुझे
तुम तो बचा के रख लो यारा पहले भी
इक शख़्स ने ग़ुस्से में हारा है मुझे
सब पूछते वो ख़ूब-सूरत कौन है
वो वो है जो जाँ से भी प्यारा है मुझे
झुमके नहीं कंगन नहीं नथ भी नहीं
उस के तो सादेपन ने मारा है मुझे
लाइक किया फोटो ये तब आहट हुई
तस्वीर में शब भर निहारा है मुझे
मैं साथ हूँ उस के तुम्हें दिक़्क़त है क्यूँ
क़िस्मत मेरी उस ने पुकारा है मुझे
वो हो बुरा हो मतलबी हो बे-वफ़ा
जैसा भी हो वैसा गवारा है मुझे
— Rudransh Trigunayat















