ponch kar ashk apni aankhoñ se muskuraao to koii baat bane | पोंछ कर अश्क अपनी आँखों से मुस्कुराओ तो कोई बात बने

  - Sahir Ludhianvi

पोंछ कर अश्क अपनी आँखों से मुस्कुराओ तो कोई बात बने
सर झुकाने से कुछ नहीं होता सर उठाओ तो कोई बात बने

ज़िन्दगी भीक में नहीं मिलती ज़िन्दगी बढ़ के छीनी जाती है
अपना हक़ संग-दिल ज़माने से छीन पाओ तो कोई बात बने

रंग और नस्ल ज़ात और मज़हब जो भी है आदमी से कमतर है
इस हक़ीक़त को तुम भी मेरी तरह मान जाओ तो कोई बात बने

नफ़रतों के जहान में हम को प्यार की बस्तियाँ बसानी हैं
दूर रहना कोई कमाल नहीं पास आओ तो कोई बात बने

  - Sahir Ludhianvi

More by Sahir Ludhianvi

As you were reading Shayari by Sahir Ludhianvi

Similar Writers

our suggestion based on Sahir Ludhianvi

Similar Moods

As you were reading undefined Shayari