chaand jaise mukhde par til jo kaala kaala hai | चाँद जैसे मुखड़े पर तिल जो काला काला है

  - SALIM RAZA REWA

चाँद जैसे मुखड़े पर तिल जो काला काला है
मेरे घर के आँगन में सुरमई उजाला है

 
वज़्म ये सजी कैसी कैसा ये उजाला है

महकी सी फ़ज़ाएँ हैं कौन आने वाला है
 

मुफ़लिसी से रिश्ता है ग़म से दोस्ती अपनी
मुश्किलों को भी हमने दिल में अपने पाला है

 
उसकी शोख़ नज़रों ने ज़िंदगी बदल डाली

अब तो मेरे जीवन में हर तरफ़ उजाला है
 भूल वो गया मुझको ग़म नहीं रज़ा लेकिन

हमने उसकी यादों को अब तलक सँभाला है

  - SALIM RAZA REWA

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