नाज़-ओ-अदा के साथ कभी बे-रुख़ी के साथ
दिल में उतर गया वो बड़ी सादगी के साथ
आएगा मुश्किलों में भी जीने का फ़न तुझे
कुछ दिन गुज़ार ले तू मेरी ज़िंदगी के साथ
ख़ून-ए-जिगर निचोड़ के रखते हैं शे'र में
यूँँ ही नहीं है प्यार मुझे शायरी के साथ
अच्छी तरह से आपने जाना नहीं जिसे
यारी कभी न कीजिए उस अजनबी के साथ
मुश्किल में कैसे जीते हैं ये उन सेे पूछिए
गुज़रा है जिनका वक़्त सदा मुफ़लिसी के साथ
उस पर न ऐतिबार कभी कीजिए 'रज़ा'
धोका किया है जिसने हमेशा सभी के साथ
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