आसी हूँ ख़बर मेरी महबूब-ए-ख़ुदा लेना
मुझको भी मदीने में सरकार बुला लेना
उस गर्मी-ए-महशर से लिल्लाह बचा लेना
मुझको भी मेरे आक़ा कमली में छुपा लेना
सरकार-ए-दो-आलम का जब ज़िक्र किया जाए
उस वक़्त दुरूद अपने होंटों पे सजा लेना
फ़रियाद यही मेरी सरकार-ए-दो-आलम है
मरने से ज़रा पहले रौज़े को दिखा देना
अल्लाह रज़ा पर भी हो जाए करम इतना
सदक़े में मुहम्मद के हर ग़म से बचा लेना
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