इस तरह तेरे तसव्वुर में मगन हो जाऊँहम को अपनों से न ग़ैरों से कोई काम रहेजब तेरी दीद को हम शहर में तेरे पहुँचेअपने दामन से न लिपटा कोई इल्ज़ाम रहे— SALIM RAZA REWA