तेरे सुपुर्द किया मैंने ज़िंदगी मौला
तेरे करम की हो मुझपर भी रहबरी मौला
चमक रही जो फ़ज़ाओं में चाँदनी मौला
तेरे ही दम से ये रौशन है रौशनी मौला
झुका दिया है जो सजदे में मैंने सर अपना
गुनाहगार की पूरी हो बन्दगी मौला
तेरे सुपुर्द किया है मुक़द्दमा अपना
हर एक गुनाह से कर दे मुझे बरी मौला
हयात चीख़ती फिरती है बरहना अब तो
इसे लिबास अता कर सदाक़ती मौला
तेरी चमक से चमकते हैं सब चमक वाले
तेरे ही दम से है दुनिया हरी-भरी मौला
तेरे ही याद से रौशन है प्यार की गलियाँ
तेरे ही दम से मुनव्वर है ज़िंदगी मौला
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