ये मत कहना कोई कमतर होता है
दुनिया में इन्सान बराबर होता है
टूटा-फूटा गिरा-पड़ा कुछ तंग सही
अपना घर तो अपना ही घर होता है
ताल में पंछी पनघट गागर चौपालें
कितना सुन्दर गाँव का मंज़र होता है
काम नहीं है तीरों का तलवारों का
प्यार तो गोली बम से बेहतर होता है
मुश्किल में जो साथ रहे अपना बनकर
वो ही हमदम वो ही रहबर होता है
As you were reading Shayari by SALIM RAZA REWA
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