ye mat kehna koii kamtar hota hai | ये मत कहना कोई कमतर होता है  

  - SALIM RAZA REWA

ये मत कहना कोई कमतर होता है  

दुनिया में इन्सान बराबर होता है



टूटा-फूटा गिरा-पड़ा कुछ तंग सही 

अपना घर तो अपना ही घर होता है



ताल में पंछी पनघट गागर चौपालें 

कितना सुन्दर गाँव का मंज़र होता है



काम नहीं है तीरों का तलवारों का

प्यार तो गोली बम से बेहतर होता है 

मुश्किल में जो साथ रहे अपना बनकर
वो ही हमदम वो ही रहबर होता है

  - SALIM RAZA REWA

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