करम की इक नज़र मुझपर भी डालो या रसूल अल्लाह
तमन्ना है मदीने में बुला लो या रसूल अल्लाह
अँधेरी रात है मझधार में अटकी मेरी नय्या
बड़ी मुश्किल में हैं अब तो सँभालो या रसूल अल्लाह
मुझे घेरे हुए हैं ग़म के लश्कर हो करम मुझ पर
ज़माने के हर इक ग़म से बचा लो या रसूल अल्लाह
तुम्हारे 'इश्क़ में मर जाऊँगा ऐसा मुझे लगता
बना लो या नबी अपना बना लो या रसूल अल्लाह
'रज़ा' अपने गुनाहों पर बहुत शर्मिंदा है आक़ा
मुझे दामान-ए-रहमत में छुपा लो या रसूल अल्लाह
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