मुस्कुराता हुआ यादों में कोई आता है
बनके ख़ुशबू मेरी साँसों में उतर जाता है
जब तसव्वुर में तेरा चेहरा बना लेता हूँ
तब कहीं जाके मेरे दिल को सुकूँ आता है
तेरी तस्वीर को आँखों में बसाया जब से
तेरा ही चेहरा हर इक शय में नज़र आता है
आज भी उसको मोहब्बत है यक़ीनन मुझ सेे
जब भी मिलता है वो शरमा के निकल जाता है
क्यूँँ भला मान लूँ ये 'इश्क़ नहीं है उसका
जबकि तन्हाई में गीतों को मेरे गाता है
Read Full